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How to write hindi patra?

3 Answer(s) Available
Answer # 1 #
  • सरलता- पत्र सरल भाषा में लिखना चाहिए। .
  • स्पष्टता- जो भी हमें पत्र में लिखना है यदि स्पष्ट, सुमधुर होगा तो पत्र प्रभावशाली होगा। .
  • संक्षिप्तता- पत्र में हमें अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए। .
  • शिष्टाचार-पत्र प्रेषक और पत्र पाने वाले के बीच कोई न कोई संबंध होता है
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Sheershak Shahid
CHIEF DISPATCHER
Answer # 2 #

तब से लेकर आज तक दुनिया कितनी बदल चुकी है आज की इस डिजिटल दुनिया में किसी को सन्देश पहुँचाना जहाँ सेकेण्डों का काम हो गया है।

वही पत्र लेखन को आज भी लोगों ने पूर्ण रूप से छोड़ा नहीं है। आज भी आप देखेंगे की लोग पत्र व्यवहार के माध्यम से एक दूसरे को बधाई, निमंत्रण, शिकायत, व्यवसाय आदि से संबंधित कार्य कर रहे हैं।

दोस्तों पत्र लेखन मनुष्य के द्वारा विकसित एक ऐसी कला है जिसमें प्रेषक पत्र में अपने भाव, उद्देश्य, कारण आदि का वर्णन करता है। आज के इस लेख में हम आपको एक अच्छा और शालीन भाषा में लिखा पत्र कैसा होना चाहिए, प्रभावपूर्ण हिंदी पत्र लेखन क्या होता हैं, पत्र लेखन के कितने प्रकार होते हैं आदि से संबंधित जानकारी प्रदान करेंगे।

पत्र लेखन वह माध्यम है जिसकी सहायता से आप किसी व्यक्ति, संस्था या अन्य किसी से परस्पर संवाद कर सकते हैं। पत्र लेखन यह ध्यान जरूर रखा जाना चाहिए की पत्र की भाषा शालीन और प्रभावपूर्ण हो.

पत्र में यह स्पष्ट जरूर हो पत्र किसके लिए लिखा गया है, पत्र में पत्र लिखने का कारण स्पष्ट हो, पत्र में प्रकट किये गए विचार। जिस भी पत्र में यह सभी जानकारियां समाहित होती हैं उसे एक अच्छा पत्र लेखन माना जाता है।

पत्र लेखन को लिखने के आधार पर मुख्यतः दो रूपों में बांटा गया है, जिसके बारे में हमने आपको आगे बताया है –

औपचारिक पत्र (Formal Letter) :- औपचारिक पत्र में वह लेटर आते हैं जो किसी सरकारी / व्यवसायिक संस्था या किसी अधिकारी के द्वारा किसी व्यक्ति / संस्थान को लिखा जाता है। इस तरह के पत्र को सरकारी कार्यालयों के बीच पत्र व्यवहार के लिए, कॉलेज और स्टूडेंट के बीच पत्र व्यवहार के लिए आदि के संबंध में उपयोग किया जाता है।

दोस्तों यहां आपको बता रहे हैं की औपचारिक पत्र (Formal Letter Format) किस तरह का होता है आप यहाँ बिंदुवार दी गयी जानकारियों में पढ़ सकते हैं –

दोस्तों विभिन्न उपयोग के संबंध में औपचारिक पत्र अलग-अलग होते हैं। औपचारिक पत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न पत्रों के बारे में हमने आपको नीचे बताया है –

औपचारिक पत्रों को मुख्यतः दो प्रकार के वर्ग में विभाजित किया गया है जो निम्नलिखित इस प्रकार है –

व्यापारिक पत्र की विशेषताएं :-

उपरोक्त वर्ग के अंतर्गत निम्नलिखित श्रेणी के पत्र आते हैं जो हमने आपको नीचे बताये हैं।

अनौपचारिक पत्र (Informal Letter): – अनौपचारिक पत्र उनकों कहा जाता है जो किसी व्यक्ति के द्वारा अपनी निजी रिश्तेदारों, मित्रगण, माता-पिता, पुत्र-पुत्री आदि को लिखा जाता है। ऐसे पत्र में बधाई सन्देश, निमंत्रण पत्र, शोक संदेश, पिता को पुत्र का पत्र, मित्र को पत्र आदि सम्मिलित हैं।

5, गाँधी रोड,दिल्ली ।

5 अप्रैल, 20…..

प्रिय सुरेश ,

इस वर्ष तुम्हारे परीक्षा का परिणाम जानकर अत्यन्त प्रसन्नता हुई। तुम प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुये हो एवं कक्षा में अच्छे स्थान पर भी आये हो। मैं तुम्हारा इस सफलता पर तुम्हें बधाई देता हूँ। मेरे परिवार के सभी सदस्य तुम्हारे इस परिणाम से अत्यन्त खुश है। अंकल एवं आण्टी को मेरा सादर प्रणाम। तुमसे शीघ्र ही पत्र के उत्तर की कामना रखता हूँ।

धन्यवाद ,तुम्हारा प्रिय मित्र सोहन

बाहुबली चौकबारापत्थरसिवनीदिनांक- 7 जुलाई 2023 पूज्य पिताजी,चरण स्पर्श प्रणाम।मैं यहाँ पर कुशल पूर्वक हूँ। आशा करता हूँ आप भी माताजी और परिवार सहित सकुशल होगे। इस समय मेरी पढ़ाई बहुत अच्छी चल रही है। कोरोना काल की वजह से मेरी परीक्षाएँ आगामी समय तक के लिए बढ़ा दी गई है और अभी यह तय नहीं है कि परीक्षाएँ कब होंगी? किंतु मैंने अपनी पढ़ाई सतत रूप से जारी रखी है।

मुझे अपने कमरे का किराया चुकाना है इस हेतु कुछ रुपयों की आवश्यकता है। आप मेरे बैंक अकाउंट में कुछ रुपए जमा करा दें, जिन्हें मैं अपने एटीएम से निकाल कर किराया का भुगतान कर सकूँ।बाकी सब ठीक है। परीक्षा समाप्ति के पश्चात से शीघ्र ही मैं घर पहुँचुंगा। माता जी को मेरा प्रणाम कहिएगा।आपका प्रिय पुत्रराहुल

औपचारिक पत्र (Formal letter) लिखते समय आपको इन निम्नलिखित तत्वों का ध्यान रखना होता है –

औपचारिक पत्र (Informal letter) लिखते समय आपको इन निम्नलिखित तत्वों का ध्यान रखना होता है –

5/215देव कॉलोनी, निर्माण नगर,दिल्ली ।

प्रिय कपिल,

कल ही तुम्हारा पत्र मिला। समाचार ज्ञात हुआ कि तुम्हारा ग्रीष्मावकाश आरंभ हो गया है। इस बार के ग्रीष्मावकाश में मेरा मन कर रहा है हम दोनों मिलकर मेरे गांव में छुट्टियों का आनंद उठाये।

मेरा विचार यह है कि क्यों न तुम इस बार मेरे गाँव में आकर गर्मी की छुट्टियाँ व्यतीत करो। तुम तो जानते ही हो कि हमारे गाँव एक पर्यटन स्थल यहाँ पर देखने लायक हवेली है और साथ ही यहाँ गर्मियों में प्रतिवर्ष हमारे ईस्ट देवता रामदेव जी का मेला लगता है।

उनका यहाँ बड़ा ही भव्य एवं प्राचीन मंदिर है। यहाँ पर लोग दूर दूर से दर्शन करने आते है। हम यहाँ पर मन्दिर में सेवा कर के बहुत आनंद उठाते है।यदि तुम कुछ दिनों के लिए ही सही, यहाँ आ सको तो मुझे अपार खुशी होगी। मेरे माता-पिता भी यही इच्छा रखते हैं। मैं तुम्हारे उत्तर की प्रतीक्षा करूँगा।

तुम्हारा प्रिय मित्ररविंद्र कुमार

मालवीय नगर पुरानी दिल्ली7 जुलाई 2023 आदरणीय नाना जीसादर प्रणाम

अपने जन्मदिन पर आपके द्वारा भेजी गई कहानियों की किताब प्राप्त हुई। मुझे आपका यह उपहार बहुत अच्छा और उपयोगी लगा। मैं बहुत लंबे समय से एक अच्छी कहानियों की किताब पढ़ना चाह रहा था, और उसकी खोज कर रहा था, जाने कैसे आपने मेरे मन की बात जान ली।आपकी किताब पा कर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। मैं इसे पढने के लिए बहुत उत्साहित हूँ। मेरे बारे में इतना सोचने के लिए और मुझे मेरी पसंद का उपहार देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

आदरणीय नानी जी को मेरा प्रणाम कहियेगा।आपका नातीअभिषेक

सेवा में,श्री मान प्रधानाचार्य जी उच्च माध्यमिक विद्यालय , लखनऊ

महोदय,

मैं विकास कुमार आपके विद्यालय कक्षा 10 का छात्र हूँ आपको बता दूँ गत वर्षों में कक्षा 8 और 9 में मैंने पूरी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। प्रधानाचार्य जी मेरा आपसे यह कहना चाहता हूँ की मेरे पिता जी की मासिक आय 4,000 रूपये हैं और परिवार का खर्च बड़ी मुश्किल से चलता है। आचार्य जी मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं और मेरे पिता जी विद्यालय का शुल्क देने में असमर्थ हैं। परन्तु मैं अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहता हूँ। इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ की मेरा विद्यालय का शुल्क माफ़ किया जाय। यदि आप मेरा शुल्क माफ़ करते हैं तो मैं मेरा परिवार आपके बहुत – बहुत आभारी होंगे।

धन्यवाद आपका आज्ञाकारी शिष्य विकास कुमार कक्षा 10 रोल नंबर :- 65

व्यवस्थापक महोदय साकेत नगर, दरियागंज (नई दिल्ली)पुस्तकमहल प्रकाशन (रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क)

विषय :- कक्षा 8 की संबंधित विषय की किताबें मंगवाने हेतु

सविनय निवेदन इस प्रकार है की पत्र में बतायी गयी पुस्तकों को ट्रांसपोर्ट कंपनी के द्वारा तुरंत भेजने की व्यवस्था करें पुस्तकों से संबंधित विवरण हमने आपको नीचे दिया है –

धन्यवाद पुस्तक भेजने का पता :-सुभाष नगरशीतल गंज बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)

भवदीय डीलर बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)दिनांक :- 7 जुलाई 2023

औपचारिक पत्र – सड़क के गड्ढों के कारण हो रही परेशानी के संबंध में पत्र।

11/4, नवादासाकेत नगर दिल्लीदिनांक: 07 जुलाई 2023 सेवा में,संपादक महोदय,नवभारत टाइम्स,

विषय- हमारे क्षेत्र में सड़क में गड्ढों के कारण हो रही परेशानी के संबंध में

महोदय,

मैं आपके लोकप्रिय दैनिक समाचार के माध्यम से सम्बंधित अधिकारीयों को सूचित करना चाहता हूँ कि सड़कों पर गड्ढे होने के कारण हमें अपने क्षेत्र में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, कुछ दिन पहले ही बारिश का मौसम शुरू हुआ है जिससे हमारी समस्याएं और बढ़ गयी हैं।

इस संकट का सामना सबसे अधिक आम लोगो को, दुकानदारों को और छात्रों को करना पड़ रहा है। गड्ढों के कारण गाड़ियों को निकालने में दिक्कत होती है, जिसकी वजह से मुख्य सड़क पर लम्बा जाम लगा रहता है। राहगीरों के लिए भी सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। गड्ढों से होने वाले हादसों की समस्या तो और भी अधिक गंभीर हो गयी है।

इसलिए मैं आपके अखबार की सहायता से सम्बंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है कि आप हमारी मदद करने में सक्षम होंगे और जल्द से जल्द हमारी इस समस्या का समाधान निकालने का कार्य किया जाएगा। इस कार्य में आपके सहयोग के लिए मैं आपकी सदा आभारी रहूँगा।

धन्यवादभवदीयदिनेश मेहरा

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Devsena Behl
Door To Door Salesmen
Answer # 3 #

एक व्यक्ति अपनी भावनाओं को एक कागज के पत्र पर लिखकर दूसरे व्यक्ति के सामने प्रकट करता है, उस प्रोसेस को पत्र लेखन कहा जाता है। पत्र लेखन को चिठ्ठी भी कहा जाता है। कोई व्यक्ति जब अपनी भावनाओं को दूसरे के सामने प्रकट करता है, तो पत्र प्राप्त करने वाला व्यक्ति भी उस पत्र का जवाब पत्र के माध्यम से उस व्यक्ति तक पहुंचाता है। कुछ दशक पहले एक स्थान से दूसरे स्थान तक संदेश भेजने का एक मात्र साधन पत्र ही था।

नीचे कुछ बिंदु दिए गए हैं जो पत्र लिखने के लिए बहुत ही आवश्यक है-

पत्र लेखन की उपयोगिता अथवा महत्व नीचे बताए गए हैं-

पत्र लेखन से संबंधित कई सारे महत्व हैं, लेकिन इन महत्वों का लाभ तभी उठाया जा सकता है जब पत्र एक आदर्श पत्र की भांति लिखा गया हो। नीचे इनके बारे में विस्तार से बताया गया है-

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पत्र लेखन के अंदर आने वाले औपचारिक और अनौपचारिक पत्रों में क्या अंतर होता है, यह नीचे बताया गया है-

अनौपचारिक पत्र लिखने के उद्देश्य नीचे दिए गए हैं-

तत्वों के नाम इस प्रकार हैं:

अनौपचारिक पत्र के भाग नीचे दिए गए हैं-

पत्र भेजने वाला को पत्र प्रेषक कहते हैं पत्र प्राप्त करता पत्रों को प्राप्त करने वाले को यात्रा को पाने वाले को पत्र प्राप्त करता कहते हैं I पत्र लेखन मैं अलग-अलग प्रकार के अंग होते हैं I पत्र लेखन लिखते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है I

औपचारिक पत्र हम उसे लिखते हैं जिनके साथ हमारा कोई भी पारिवारिक संबंध या निजी संबंध नहीं होता इसके अंदर हम किसी भी प्रकार की बातचीत या आत्मीयता का समावेश नहीं करते। औपचारिक पत्र लेखन में हम नीचे बताए गए कुछ मुख्य बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

1. प्रार्थना पत्र – विद्यालय में किसी भी प्रकार की समस्या से संबंधित प्रार्थना पत्र लिखा जाता है।

2. आवेदन पत्र – किसी भी कंपनी यह संस्था में नौकरी के लिए आवेदन पत्र लिखा जाता है।

3. बधाई पत्र – जब भी हम किसी भी अधिकारी को उसी सफलता की उपलब्धि पर पत्र लिखते हैं उसे बधाई पत्र लेखन कहते हैं।

4. शुभकामना पत्र – किसी भी अधिकारी को जब हम किसी यात्रा या पदोन्नति की प्राप्ति पर पत्र लिखता है उसे शुभकामना पत्र लेखन कहते हैं।

5. व्यावसायिक पत्र – जब हम किसी व्यापारिक फैशन शो को पत्र लिखते हैं उसे व्यावसायिक पत्र कहता है।

6. शिकायती पत्र – जब हम किसी भी समस्या हो या  कठिनाई के आधारी पत्र लिखता है उसे शिकायती पत्र लेखन कहता है।

7. धन्यवाद पत्र – जब हम किसी भी कार्यक्रम यह विशेष उत्सव के लिए धन्यवाद देने के लिए पत्र लिखता है उसे धन्यवाद पत्र लेखन कहते हैं।

8. सांत्वना पत्र – जब हम किसी भी अधिकारी के स्वयं या उसी परिवार के सदस्य के साथ दुर्घटना ग्रस्त हादसा होने पर जब हम पत्र लिखते हैं उसे हम सांत्वना पत्र कहते हैं।

9. संपादकीय पत्र – जब हम किसी भी सरकारी अधिकारी को बात पहुंचाने के लिए समाचार पत्र के संपादक का माध्यम से अपनी बात पहुँचाते है तब वह पत्र को संपर्क किए पत्र लेखन कहते हैं।

मुख्य तीन भागों में औपचारिक पत्र को बाँटा गया है:

औपचारिक पत्रों को निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया जा सकता हैं

औपचारिक पत्र लेखन हिंदी लिखते समय ध्यान रखने योग्य बातें

औपचारिक letter writing in Hindi के निम्नलिखित सात अंग होते हैं

(1) पत्र प्रापक का पदनाम तथा पता।(2) विषय- जिसके बारे में पत्र लिखा जा रहा है, उसे केवल एक ही वाक्य में शब्द-संकेतों में लिखें।(3) संबोधन- जिसे पत्र लिखा जा रहा है- महोदय, माननीय आदि।(4) विषय-वस्तु-इसे दो अनुच्छेदों में लिखें : पहला अनुच्छेद – अपनी समस्या के बारे में लिखें।दूसरा अनुच्छेद – आप उनसे क्या अपेक्षा रखते हैं, उसे लिखें तथा धन्यवाद के साथ समाप्त करें।(5) हस्ताक्षर व नाम- भवदीय/भवदीया के नीचे अपने हस्ताक्षर करें तथा उसके नीचे अपना नाम लिखें।(6) प्रेषक का पता- शहर का मुहल्ला/इलाका, शहर, पिनकोड।(7) दिनांक।

सेवा मेंप्रधानाचार्यकेंद्रीय विद्यालय

अहमदाबाद गुजरात

महोदय,सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में दक्षिण कक्षा में पढ़ती हूं। इसी सत्र में मैंने बोर्ड की परीक्षा दी है। मेरे परिवार में ज्यादातर लोग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में है , मुझे भी विज्ञान विषय में बहुत ही रुचि है और मैं भी इंजीनियर बनना चाहती हूं। दसवीं कक्षा में मैंने 90% अंक प्राप्त किए हैं और 92% मैंने विज्ञान के विषय में प्राप्त किए हैं। मैं आपसे यह प्रार्थना करती हूं कि मुझे 11वीं कक्षा में विज्ञान विषय लेने के लिए अनुमति दें और मैं इंजीनियर बनने का अपना सपना साकार कर सकूं।

आपकी अति कृपा होगी

धन्यवाद

आपकी आज्ञाकारीनिकिता शर्माकक्षा 108 अप्रैल 2021

परीक्षा भवननई दिल्लीदिनांक: 1 जनवरी, 20xx

प्रधानाचार्य जीसमरविला हाई स्कूल

मयूर विहार

दिल्ली-110091

विषय: हिंदी अध्यापक के पद हेतु आवेदन-पत्र

महोदय, आपके द्वारा ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में प्रकाशित विज्ञापन के प्रत्युत्तर में मैं हिंदी अध्यापक के पद हेतु अपना आवेदन-पत्र भेज रहा हूँ। मेरा व्यक्तिगत विवरण निम्नलिखित है: नाम: क०ख०ग०, पिता का नाम: अब०स०, जन्म तिथि: 20 मई, 1970. क्षणिक योग्यता अर्थ:

– मैंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से दसवीं की परीक्षा 1986 में 70% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।– मैंने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से बारहवीं की परीक्षा 1988 में 78% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।– दिल्ली विश्वविद्यालय से बी०ए० की परीक्षा 1992 में 72% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।– मैंने रोहतक विश्वविद्यालय से बी०एड्० की परीक्षा 1993 में 70% अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की है।

मैं पिछले वर्ष डी०ए०वी० स्कूल, कृष्णा नगर में हिंदी अध्यापक के पद पर कार्य कर चुका हूँ। यह पद मात्र एक वर्ष के लिए ही रिक्त था। इसलिए मुझे वहाँ से कार्य छोड़ना पड़ा है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि यदि आपकी चयन समिति ने मुझे यह अवसर प्रदान किया, तो निश्चित ही मैं आपकी उम्मीदों पर खरा उतरूँगा और अपनी पूरी निष्ठा व लगन के साथ काम करूँगा।

धन्यवाद सहितभवदीयचीराग

बी०पी० 153शालीमार बागदिल्लीदिनांक: 25 जनवरी, 20XX

बेसिक शिक्षा अधिकारीजिला परिषदलखनऊ (उ०प्र०)

विषय: प्राइमरी शिक्षक के पद के लिए आवेदन-पत्र

मान्यवरदिनांक 24 जनवरी, 20XX के दैनिक समाचार पत्र ‘दैनिक जागरण’ से ज्ञात हुआ कि आपके विभाग में प्राइमरी शिक्षकों के कुछ स्थान रिक्त हैं। उन पदों के लिए आवेदन-पत्र आमंत्रित किए गए हैं। मैं भी अपने को इस पद के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करना चाहती हूँ। मेरी योग्यताएँ व अन्य विवरण इस प्रकार हैं: नाम: संगीता जुनेजा, पिता का नाम: श्री सुरेश कुमार जुनेजा। जन्मतिथि: 17 अगस्त, 1975 स्थायी पता बी०पी० 153, शालीमार बाग, दिल्लीI शैक्षणिक योग्यताएँ:

– बारहवीं– बी०ए०– बेसिक टीचर कोर्स

अन्य योग्यताएँ:– शास्त्रीय संगीत में डिप्लोमा– सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पुरस्कृत– महाविद्यालय की हिंदी साहित्य परिषद की सचिव

अनुभव: डी०ए०वी० मिडिल स्कूल, कानपुर में प्राइमरी शिक्षक के पद पर कार्यरत।महोदय, यदि उक्त पद पर कार्य करने का अवसर प्रदान करें, तो मैं अपनी कार्यकुशलता से अपने अधिकारियों को संतुष्ट रखने का प्रयास करूँगी तथा पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करूँगी। प्रार्थना-पत्र के साथ सभी प्रमाण-पत्रों की प्रतियाँ संलग्न हैं।

धन्यवादभवदीयासंगीता जुनेजा

औपचारिक पत्र लेखन इस प्रकार है:

अनौपचारिक-पत्र लिखते समय ध्यान रखने योग्य बातें

अनौपचारिक पत्र की प्रशस्ति, अभिवादन व समाप्ति

(2)औपचारिक पत्र- प्रधानाचार्य, पदाधिकारियों, व्यापारियों, ग्राहकों, पुस्तक विक्रेता, सम्पादक आदि को लिखे गए पत्र औपचारिक पत्र कहलाते हैं।

52, सरदार चौकदिल्लीप्रिय मित्रों धर्मेशसस्नेह नमस्ते

अभी अभी तुम्हारा पत्र मिला , यह जानकर बहुत खुशी हो रही है कि तुम 25 अप्रैल को कनाडा जा रहे हो। बचपन से ही तुम विदेश आने का सपना देखा करते थे। अब बोलो सपना तुम्हारा साकार होने को आ रहा है। कनाडा जाने के लिए मेरे पूरे परिवार की तरफ से तुम्हें बहुत सारी शुभकामना और तुम्हारी यात्रा सफल रहे। वहां जाकर मुझे भूल मत जाना और पत्र लिखते रहना।

मेरे प्रिय मित्र धर्मेश , इस बात का हमेशा ध्यान रखना कि तुम भारतीय हो वहां जाकर अपनी सभ्यता और संस्कृति को भूल मत जाना। तुम जैसे हो वैसे ही रहना अपने स्वभाव और व्यवहार पर विदेशी प्रभाव को पढ़ने मत देना। हार्दिक शुभकामना।

तुम्हारा मित्रदीप

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Olexandra Warsi
POULTRY HANGER